Tuesday, October 20, 2026

अपनी बात

त्यागपत्र और अराजकता…

हमें कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी के व्यवहार से ऐसा महसूस होता है कि ये दोनों राहुल गाँधी के मित्र नहीं हैं और...

ग़ज़ल एवं गीत

डॉ. शिवनारायण की ग़ज़लें

1. कदम-कदम पर लाखों छल भीड़ बहुत है धीरे चल सारे ख़त को खोलें हम शायद कोई निकले हल हर दिल यह क्यों सोच रहा कैसा होगा अपना कल होंठों पर...

बलजीत सिंह की गज़लें

  ग़ज़ल 1 लग रहा था कि घर में तन्हा हूँ मैं तो लेकिन नगर में तन्हा हूँ साथ मेरे है क़ाफिला फिर भी है तअज्जुब सफ़र में तन्हा...

साक्षात्कार

कविता

सुरेश चौधरी के दोहे

1. उजियारा होते छिपें, तम में करें विहार। तिलचट्टों की चाल पर, चलते आज विचार॥ 2. कॉकरोच से भागते, डरकर सारे लोग। जहाँ मिले कुछ जूठनें, वहीं लगाएँ भोग॥ 3. इधर-उधर...

व्यंग्य

फ़िल्म समीक्षा

ठिठकी हुई ‘सतलुज’-फ़िल्म समीक्षा

 सुशील उपाध्याय फिल्म 'सतलुज' (पुराना नाम 'पंजाब 95')। जो लोग इसे नहीं देखना चाहते थे, अब वे भी इसे देखने का जुगाड़ लगा रहे...

कहानी

महेश शर्मा की कहानी-मन के पापी   

 कहावतें ऐसे ही नहीं बना करती। बरसों बरस के अनुभवों के बाद कई कई लोगों की टिप्पणियों के बाद जनमानस में बनने वाली धारणा...

रिज़वान गुल की सिन्धी कहानी – हसरतों का ख़ून

अनुवाद: देवी नागरानी रात के मौन सन्नाटे में बड़े से घर के एक अंधकारपूर्ण कमरे में से निरंतर एक बूढ़े शख़्स के खाँसने की आवाज़...

एफ एम सलीम की कहानी- वन वे

मीर इरफान अली पांच भाई बहनों में दूसरे नंबर के हैं। कभी पुरखे नवाब रहे होंगे, लेकिन अब नवाबियत भी नहीं रही। बड़े भाई...

डॉ. मनोज मोक्षेन्द्र की कहानी- बाढ़ में बरक़त

उस रात नदी ने कोई आवाज़ नहीं की थी. बस्स, जिस तरह कोई नरभक्षी तेंदुआ अपने शिकार की तरफ दबे पाँव बढ़ता जाता है...

दीपक शर्मा की कहानी कुर्सी के कवि

“श्री विशेश्वर नाथ घर पर हैं क्या?” बाहर चूड़ियों की खनखनाहट के साथ मधुर एक स्त्री- स्वर खनका। “एक मिनट,” वैजयंती मेरे पास चली आई।...

लघुकथा

रजनी की सास को आज राशन लेने जाना था, जहाँ भीड़ और लम्बी क्यू के चलते उनके तीन चार घंटे से पहले लौटने की...

लेख

हलचल

पुस्तक