Thursday, August 6, 2026

अपनी बात

क्लासिक पुस्तकों का भविष्य..

बहुत बार ऐसा हुआ है कि मैंने कोई उपन्यास, कहानी या ग्रंथ पढ़ा और मुझे महसूस हुआ कि यह कृति मैंने क्यों नहीं लिखी!......

ग़ज़ल एवं गीत

ज्ञान प्रकाश विवेक – ग़ज़लें

1. जेब ख़ाली हो तो बाज़ार से डर लगता है घर में रहता हूं तो इतवार से डर लगता है। ये बनावट ये अदावत ये सियासत तेरी तेरे...

आशुतोष कुमार की ग़ज़लें

ग़ज़ल - 1 अब वो परवाने कहाँ जो शम्अ के थे साथ जलते मर गयी शायद महब्बत अब नहीं पत्थर पिघलते खाये धोखे ज़िंदगी में इस क़दर...

साक्षात्कार

कविता

कृष्ण कुमार गुप्ता की कविताएँ

संघर्ष जीवन की हर राह पर कांटे होंते हैं शायद कई राहों पे अँधेरा भी अड़ेगा भले हमारे पैरों में छाले दिखने लगें हमको अनवरत लड़ते रहना पड़ेगा रुकना...

व्यंग्य

फ़िल्म समीक्षा

ठिठकी हुई ‘सतलुज’-फ़िल्म समीक्षा

 सुशील उपाध्याय फिल्म 'सतलुज' (पुराना नाम 'पंजाब 95')। जो लोग इसे नहीं देखना चाहते थे, अब वे भी इसे देखने का जुगाड़ लगा रहे...

कहानी

प्रेमचंद्र की कहानी मंत्र का नाट्य रूपांतरण-डॉ चंद्रशेखर तिवारी

 पात्र-परिचय 1. सूत्रधार : नाटक की भूमिका और सन्देश बताने के लिए। 2. डॉ. चड्ढा : एक प्रसिद्ध, घमण्डी और नियम-निष्ठ डॉक्टर। 3. बूढ़ा भगत : एक...

जिज्ञासा सिंह की कहानी- कतर ब्योंत

“कहते हैं, समय हर घाव भर देता है, पर समय का दिया हुआ घाव हो, तब न! जब समय घाव देगा तो उसे दुरुस्त...

अल्पना मिश्र की कहानी – तोताजान

आकाश में पक्षी उड़ते हुए खूबसूरत लगते हैं। पेड़ों पर बैठे बोलते, गाते भी सुंदर लगते हैं। कभी कभी रूक कर उन्हें निहारने में...

पल्लवी सक्सेना की कहानी -आखिरी धक्का

जीवन में ना जाने कितने धक्के लिखे होते हैं ना बऊजी। जन्म से लेकर मृत्यु तक मनुष्य केवल धक्के ही खाता रहता है।...

डॉ जया आनंद कहानी-बोझ!

कॉलेज की गहमागहमी, शोर , लेक्चर शुरू होने वाली घंटियां, शिक्षकों का दौड़ते भागते स्टाफ रूम में प्रवेश और स्टाफ रूम में  शिक्षकों के...

लघुकथा

लघुकथा मेरे लिए केवल एक विधा नहीं, बल्कि जीवन के उन क्षणों को दर्ज करने का माध्यम है जो अक्सर हमारी दृष्टि से छूट...

लेख

हलचल

पुस्तक