Monday, June 29, 2026

अपनी बात

भारतीय पासपोर्ट और नागरिकता…

मुझे अच्छी तरह याद है कि भारतीय पासपोर्ट में लिखा रहता है कि धारक भारतीय नागरिक है। 1980 के दशक में, जब पासपोर्ट की...

ग़ज़ल एवं गीत

आशुतोष कुमार की ग़ज़लें

ग़ज़ल - 1 अब वो परवाने कहाँ जो शम्अ के थे साथ जलते मर गयी शायद महब्बत अब नहीं पत्थर पिघलते खाये धोखे ज़िंदगी में इस क़दर...

पद्मश्री अशोक चक्रधर की तीन ग़ज़लें

मित्रो, पूरा हिन्दी जगत भाई अशोक चक्रधर जी के एक हास्य-व्यंग्य के कवि रूप से ही परिचित है। उनका गंभीर रचनाकर्म बहुत कम पाठकों...

साक्षात्कार

कविता

डॉ.राकेश चन्द्रा की कविता-‘मैं हूँ धुआँ’

मैं हूँ धुआँ, काला-काला, दैत्याकार, मुझे उठना है पृथ्वी से आसमान तक; पल रही है महत्वाकांक्षा मेरे अन्दर- नील गगन की छत्रछाया में तैरते चाँदी-जैसे बादलों को...

व्यंग्य

फ़िल्म समीक्षा

सिनेमा का कविता पाठ है ‘छावा’

छावा फिल्म की समीक्षा क्यों की जाए पहला तो प्रश्न यही उठना चाहिए। ऐसी फिल्में समीक्षाओं से परे की होती हैं क्योंकि आम दर्शक...

कहानी

वन्दना शर्मा की कहानी-बड़ी बेटी

आज पार्क में ज्यादा भीड़ नहीं थी। बारिश होने का मौसम हो रहा था। ठंडी हवाएँ चल रही थी। कुछ बच्चे झूला झूल रहे...

रीता गुप्ता की कहानी-आवारागर्दियों  का सफ़र    

गर्मियों की उमस भरी शाम थी, अनु को कोठरी में दम घुटता सा महसूस हुआ तो वह चारपाई उठा छत पर बिछा उस पर...

नीलिमा शर्मा की कहानी – आखिरकार

"माँ!" ... "एरी माँ!" सोयी पड़ी माँ को ऐसे लगा जैसे रमेश सपने में पुकार रहा है, बड़ी मुश्किल से तो आज आँख लगी थी।...

नीलम राकेश की कहानी – अभी मंजिल दूर है

महराजगंज आये मुझे अभी कुछ ही दिन हुये थे कि एक दिन अचानक नारी मुक्ति मंच की कुछ महिलाएं मेरे पास आई और मुझसे...

दीपक शर्मा की कहानी-सुभीता

मेरे लिए दरवाज़ा बहन ने खोला। “और कौन आया है?” अंदर के बरामदे में अपना सामान पटक कर मैं ने पूछा। “कोई नहीं। पापा ने किसी...

लघुकथा

प्रतीक्षा शाम छह बजे। स्टेशन का प्लेटफॉर्म नंबर तीन। 68 साल के दादाजी बेंच पर बैठे थे। हाथ में अटैची, आंखों में चमक। दस साल...

लेख

हलचल

पुस्तक