Wednesday, February 11, 2026

अपनी बात

ग़ज़ल एवं गीत

सुरेश कुमार ‘सौरभ’ अकवि की ग़ज़ल

तुम जो गाओ वह दुहराऊँ, ऐसा थोड़ी होगा जी। 'कोरस' का गायक बन जाऊँ, ऐसा थोड़ी होगा जी। ढोलक, तबला, हारमोनियम सभी तुम्हारे नाम हुए; मैं बैठा...

अमरेंद्र कुमार की ग़ज़लें

1 घर जिनके शीशे के वे पत्थर रखते हैं हम तो घर में दिल औ दिल में घर रखते हैं। तुम जिससे मारा करते हो सब लोगों...

साक्षात्कार

कविता

रितेश ऽ निगम की कविता – यादों के तार

सी-सेक्टर सोनागिरी की गलियों में, खेलते-कूदते बचपन की वो शामें हसीन, किसी ने पूछा घर का नंबर, मैंने कहा चौबीस, वो घर, वो गली, आज भी दिल...

व्यंग्य

फ़िल्म समीक्षा

सिनेमा का कविता पाठ है ‘छावा’

छावा फिल्म की समीक्षा क्यों की जाए पहला तो प्रश्न यही उठना चाहिए। ऐसी फिल्में समीक्षाओं से परे की होती हैं क्योंकि आम दर्शक...

कहानी

रीता गुप्ता की कहानी – और बर्गर ठंडा होता रहा

रसोई का चूल्हा सब जानता है, उसके पास होता है घरवालों के सुख दुख का लेखा जोखा क्योंकि उसने देखे होते हैं घर के...

लखनलाल पाल की कलम से – रमकल्लो की पाती (भाग 31-32)

इकत्तीसवीं पाती कड़वे घूँटों का सच ________________________________________________________________________ सरबत चाची रमकल्लो को ढाढ़स बँधा रही थी। हार का अफसोस चाची को भी था लेकिन रमकल्लो की हालत देखकर...

अंजु रंजन की कहानी – द फ़्यूनरल सर्विस

रात के दो बजे हैं। स्वाति चुपचाप रो रही  है। बाहर झींगुर सायं- सायं शोर मचा रहे हैं। रात की कोई हमिंग चिड़िया शायद...

दीपक शर्मा की कहानी – दुहाई-तिहाई

“धर्मवीर,” अपनी अर्द्धचेतना में जाई मुझे ठीक पहचान न पाईं। समझीं, मैं यशवीर नहीं हूं। धर्मवीर हूं।                   “हूं,” मैं ने उन का भ्रम न तोड़ा...

अनिता रश्मि की कहानी – बस, गर्म अंक की तलाश

लान के चार में से दो चेयर पर दो लोग बतकही में व्यस्त। किनारे से झाॅंकते उलटे अशोकों, बाउंड्री वॉल पर चढ़े बाहर झाँकते...

लघुकथा

कर्नल साहब की बेटी श्रुति बी.टेक. पूरा कर घर लौटी। गर्व से भरे कर्नल साहब ने पत्नी से कहा – “एक शानदार रिश्ता आया है।...

लेख

हलचल

पुस्तक