Sunday, May 17, 2026

अपनी बात

वक्त से दिन और रात…

1980 के दशक में जब बी आर चोपड़ा निर्देशित महाभारत का मेगा सीरियल दूरदर्शन पर दिखाया जाता था, तो उसका पहला संवाद होता था-...

ग़ज़ल एवं गीत

रेखा राजवंशी की दो ग़ज़लें

 ग़ज़ल अपनी मेहनत पे चल रहे हैं हम फिर क्यों लोगों को खल रहे हैं हम हो  गए  दूर  तेरी  दुनिया  से ख़ुद के रंगों में ढल रहे...

बेचैन कण्डियाल की ग़ज़लें

(एक) बुतों से बोलने की आस करते हो रेगिस्तान में पानी तलाश करते हो। इस शहर की खाक में सुबहो शाम किसी गुमनाम की तलाश करते हो। तुमको देखा...

साक्षात्कार

कविता

अरूणा सब्बरवाल की तीन कविताएं

1 1. कुछ तो है कुछ तो है जीवन मैं ऐसा पीर मगर अनजानी है चंचल मन अब पूछ रहा है क्यूँ इतनी हैरानी है? क्यूँ कुछ भी न कहते-कहते आँखें सब...

व्यंग्य

फ़िल्म समीक्षा

सिनेमा का कविता पाठ है ‘छावा’

छावा फिल्म की समीक्षा क्यों की जाए पहला तो प्रश्न यही उठना चाहिए। ऐसी फिल्में समीक्षाओं से परे की होती हैं क्योंकि आम दर्शक...

कहानी

मनोज कामदेव की कहानी- साइलेंट डाइवोर्स

दिल्ली के एक पॉश इलाके में खड़ी वह भव्य कोठी दूर से किसी चमकते हुए स्वप्न जैसी दिखाई देती थी, ऊँचे फाटक, संगमरमर की...

एफ एम सलीम की कहानी-सत्ता की रात

शाम होने को अभी कुछ समय बाकी था। जैसे-जैसे सूरज पश्चिम में अपनी मंजिल की तरफ दौड़ रहा था, पेड़ों का साया पूरब की...

अयाज़ क़ादरी की सिंधी कहानी – बिल्लू दादा

 अनुवाद: देवी नागरानी वह पूरे मुहल्ले में बदनाम था। हर कोई उससे किनारा करता, ऐरा-ग़ैरा तो उसका नाम भी डरते हुए लेता। पैसे वाले तो...

सुधीर कुमार सोनी की कहानी-कुमुद

ऑफिस के काम से मुक्त होकर घर लौटा और आंगन में पैर रखा ही था कि पत्नी ने कहा, “सुनो कोई महिला आई थी...

ज्योत्स्ना मिश्रा की कहानी-योग नियोग 

डर तो नहीं रहीं ? पता नहीं उसे किस बात से डरना था ? पर जब उस गहरी मर्दानी आवाज ने हल्के मद्धम स्वर में...

लघुकथा

लगभग बीस साल बाद पुरानी तीन सहेलियाँ— नीलू, रेखा और कविता कॉफ़ी कैफ़े में मिलीं। कॉलेज के दिनों की मस्ती याद करते-करते बात अचानक पतियों पर आ गई। नीलू...

लेख

हलचल

पुस्तक