Wednesday, April 8, 2026

अपनी बात

संपादकीय – डिंक चिका डिंक

डिंक दंपत्ति आमतौर पर युवा, उच्च शिक्षित और बच्चों वाले दंपत्तियों की तुलना में पूर्णकालिक नौकरी करने की अधिक संभावना रखते हैं। सामान्यतः इनकी...

ग़ज़ल एवं गीत

बेचैन कण्डियाल की ग़ज़लें

(एक) बुतों से बोलने की आस करते हो रेगिस्तान में पानी तलाश करते हो। इस शहर की खाक में सुबहो शाम किसी गुमनाम की तलाश करते हो। तुमको देखा...

डॉ. विनोद प्रकाश गुप्ता की ग़ज़लें

ग़ज़ल 1 2122-2122-2122-212 मैं किसी के ख़्वाब के साये में हूँ महका हुआ , नाम अख़बारों में पढ़ कर बल्लियों उछला हुआ । आज उसने ‘इश्क़’ कह, फिर...

साक्षात्कार

कविता

पद्मा मिश्रा की दो कविताएँ

1 - दहलीज पर खड़ी औरत दहलीज पर खडी औरत , क्या सोचती है ? नाम आँखों से निहारती आकाश का कोना कोना , उड़ने को आकुल -व्याकुल, पंख तौलती है...

व्यंग्य

फ़िल्म समीक्षा

सिनेमा का कविता पाठ है ‘छावा’

छावा फिल्म की समीक्षा क्यों की जाए पहला तो प्रश्न यही उठना चाहिए। ऐसी फिल्में समीक्षाओं से परे की होती हैं क्योंकि आम दर्शक...

कहानी

उर्मिला शिरीष की कहानी – यात्रा

माँ,  तुम बीमार नहीं हो। नहीं हो। मैंने कह दिया ना। अगर बीमार हो तो बताओ क्या बीमारी है...? इतनी जाँचें करवायीं, कोई बीमारी निकली!...

डॉ. उर्वशी की कहानी – नियंत्रण

रांची की स्मृतियाँ कभी सीधी रेखा में लौटकर नहीं आतीं—वे चुपके से आती हैं, जैसे किसी बंद खिड़की की दरार से घुसती हवा। कभी...

दीपक शर्मा की कहानी – आपदधर्म

 “चरण- स्पर्श, ताऊजी,” बाहर के बरामदे से बहू की आवाज़ मेरे कमरे तक चली आई।                  “जीती रहो, बहू, जीती रहो,” यह आशीर्वाद तो बड़े भाई...

डॉ. शिवानी कोहली आनंद की कहानी – सरहद से खत

मेरी प्रीत, शादी की पहली सालगिरह बहुत-बहुत मुबारक हो तुम्हें। माँ कैसी है?, बाबा, याद करते हैं मुझे?, छोटी कैसी है?, और हरी काका, वे...

डॉ ऋतु शर्मा ननंन पाँडे की कहानी – जिप्सी फूल

नींद में वह अक्सर किसी पुरानी भाषा को पुकारते हुए जागती थी। कभी कोई लोरी जो उसने बचपन में माँ की गोद में सुनी...

लघुकथा

1 - एक शाम मीरा एक शाम अपने दफ्तर से टेक्सी में घर लौट रही थी। बहुत तेज़ बरसात हो रही थी।  टेक्सी सिग्नल पर...

लेख

हलचल

पुस्तक